Municipality, Municipal Corporation, Municipal Council ( नगरपालिका, नगर निगम, नगर परिषद् )

Municipality, Municipal Corporation, Municipal Council, UIT
Municipality, Municipal Corporation, Municipal Council, UIT ( नगरपालिका, नगर निगम, नगर परिषद् ), नगर विकास न्यास ( UIT )

शहरी निकाय – नगरों के विकास का आधार स्थानीय स्वशासन होता है।

– भारत में सर्वप्रथम नगरीय शासन की स्थापना मद्रास में हुई।

– माउण्ट आबू में 1864 ई. में राज्य की पहली नगरपालिका स्थापित की गई।

इसके बाद अजमेर में (1866 ई. में), ब्यावर (1867 ई.) तथा जयपुर में 1869 में नगरपालिका ( Municipality ) स्थापित की गई।

– स्वतंत्रता के समय राज्य में 7 जिला बोर्ड, उदयपुर में नगर निगम तथा 136 शहरों, कस्बों में नगरपालिकाएँ कार्यरत थी।

राज्य में नगरपालिका ( Municipality ) प्रशासन में एकरूपता स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक अध्यादेश द्वारा उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1916 को राजस्थान में लागू कर दिया गया। 1950 में नगरपालिकाओं में समन्वय, निर्देशन एवं पर्यवेक्षण के लिए राज्य में स्थानीय निकाय विभाग की स्थापना की गई।

स्वतंत्रता के पश्चात् 1951 में पहली बार राजस्थान नगरपालिका ( Municipality ) अधिनियम-1951 लागू कर सम्पूर्ण राज्य के स्थानीय शहरी प्रशासन में एकरूपता स्थापित की गई।

इसे 1959 में समाप्त कर नया ‘राजस्थान नगरपालिका ( Municipality ) अधिनियम-1959′ क्रियान्वित किया गया।

– 1 जून, 1993 को 74वाँ संविधान संशोधन लागू हुआ जिसके द्वारा स्थानीय शासन की संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया।

इसके तहत संविधान में भाग 9क जोड़ा गया जिसमें अनुच्छेद 243 त से 243 छ तक शामिल किए गए है।

संविधान की 12वीं अनुसूची भी जोड़ी गई जिसमें 18 विषय शामिल किए गए।

9 अगस्त, 1994 की जारी अधिसूचना के तहत् राज्य में निम्न प्रकार की 188 शहरी स्वशासन संस्थाएँ कार्यरत हैं

(1) नगर निगम ( Municipal Corporation ) : जिन शहरों की जनसंख्या 5 लाख से अधिक हो, वहाँ की स्थानीय स्वशासन संस्था नगर निगम ( Municipal Corporation ) कहलाती है।

इसका अध्यक्ष ‘महापौर’ कहलाता है।

(2) नगर परिषद् ( Municipal Council ) : एक लाख से अधिक तथा 5 लाख तक आबादी वाले शहरों में स्थानीय स्वशासन संस्था नगर परिषद् ( Municipal Council ) होती है।

इसका अध्यक्ष सभापति होता है।

(3) नगरपालिका ( Municipality ) : एक लाख तक की आबादी वाले शहरों एवं कस्बों में स्थानीय स्वशासन की इकाई नगरपालिका ( Municipality ) होती है। नगर परिषद् ( Municipal Council ) एवं नगरपालिका ( Municipality ) का सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी अधिशाषी अधिकारी होता है, जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है।

शहरी निकायों के निगम आयुक्त की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है।

राज्य में वर्तमान में 7 नगर निगम-जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर एवं भरतपुर, 34 नगर परिषदें एवं 147 नगरपालिकाएँ हैं।

अजमेर में नगर निगम का गठन 30 जुलाई, 2008 को, बीकानेर में नगर निगम का गठन अगस्त, 2008 में उदयपुर में नगर निगम का गठन 28 मार्च, 2013 को किया गया। भरतपुर में नगर परिषद् के स्थान पर नगर निगम के गठन की अधिसूचना 13 जून, 2014 को जारी की गई।

– 7 संभाग मुख्यालयों पर नगर निगम गठित हो गये है।

– राज्य में 1 मई, 2012 से सभी जिला मुख्यालयों पर नगर पालिकाओं का नगर परिषद् के रूप में गठन कर दिया गया है। अब राज्य में 34 नगर परिषदें हो गई हैं तथा 147 नगर पालिकाएँ रह गई है। निम्न 8 शहर जिला मुख्यालय नहीं है फिर भी वहाँ नगरपरिषद् का गठन किया गया हैं

– किशनगढ़, ब्यावर, मकराना, गंगापुर सिटी, हिण्डौन सिटी, भिवाड़ी, बालोतरा, सुजानगढ़।

74वें संविधान संशोधन के लागू होने के बाद स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिल गया है तथा अब इनके चुनाव हर 5 वर्ष में उनके कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा करवाये जाने अनिवार्य हैं।

इनके सभी पदों-अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यों पर अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए तथा सभी पदों पर सभी वर्गों में 1/3 स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिये गये है जो क्रमिक रूप से लॉटरी द्वारा निर्धारित किये जाते हैं।

सितम्बर, 2008 में राज्यपाल के अध्यादेश द्वारा नगर निकायों में महिलाओं का आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया, परंतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस पर रोक लगा दी गई है।

राजस्थान नगरपालिका विधेयक 2009 के अन्तर्गत नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक में युवाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए भी नई धारा 21A जोड़ी गई थी। परन्तु 16 जुलाई, 2010 को उच्चतम न्यायालय ने महिला आरक्षण की वृद्धि रोक का आदेश पारित किया है। युवाओं के आरक्षण पर भी उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी

राजस्थान नगर पालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक -2015 – 18 सितम्बर, 2015 को राजस्थान विधान सभा में नगर पालिकाओं के चुनाव लड़ने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आवश्यकता होगी।

– अब पालिका चुनाव लड़ने वाले के घर में कार्यशील शौचालय आवश्यक कर दिया गया है और साथ ही यह तय करना होगा कि

परिवार का सदस्य भी खुले में नहीं जाता। नगर पालिका अधिनियम 2009 में संशोधन :

– स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए 10वीं पास व घर में शौचालय अनिवार्य – स्थानीय निकाय चुनाव में पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए 10वीं पास तथा घर में शौचालय की अनिवार्यता के अध्यादेश को राज्यपाल कल्याण सिंह ने 21 जुलाई, 2015 को मंजूरी प्रदान कर दी थी।

इसके पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 21 में संशोधन के लिए राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2015 का अनुमोदन किया गया।

संशोधन के तहत् स्थानीय निकायों के सदस्य निर्वाचित होने के संबंध में शैक्षणिक अर्हता का प्रावधान किया गया है।

इसके तहत नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीद्वार की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगी।

उन्हें राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या इसके समकक्ष अन्य बोर्ड का 10वीं उत्तीर्ण का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा।

नगर पालिका अधिनियम में संशोधन-राइट टू रिकॉल का प्रावधान राज्य विधानसभा ने 22 मार्च, 2011 को नगर पालिका अधिनियम में संशोधन अधिनियम पारित किया। इस

में प्रावधान है कि किसी भी शहरी निकाय (नगर निगम, नगर परिषद् या नगरपालिका) प्रमुख के हटाने के लिए निकाय पार्षदों के 3/4 बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के बाद जनमत संग्रह कराया जाएगा तथा जनमत संग्रह में अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान होने पर ही प्रमुख को पद से हटाया जा सकेगा।

यह अविश्वास प्रस्ताव निकाय प्रमुख के पदग्रहण की तिथि के दो वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर ही लाया जा सकेगा। निकाय के उपाध्यक्ष को हटाने हेतु जनमत संग्रह की आवश्यकता नहीं है।

नगर विकास न्यास ( UIT )

नगर विकास न्यास ( UIT )
नगर विकास न्यास ( UIT )

– राज्य में नगरों के सुनियोजित विकास के लिए नगर विकास न्यास UIT भी स्थापित किए गए है।

– अध्यक्ष-नगर विकास न्यास का अध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा मनोनीत होता है।

– राज्य में नगर विकास न्यास UIT -15 : अलवर, बीकानेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, कोटा, उदयपुर, श्रीगंगानगर, आबू, जैसलमेर, पाली, सीकर, बाड़मेर, चित्तौड़गढ़ एवं सवाईमाधोपुर।

UIT के कार्य : – नई बस्तियों का योजनापूर्ण निर्माण करना और उनका रखरखाव करना।

  • UIT नव विकसित बस्तियों में सड़कों का निर्माण रोशनी तथा पेयजल की व्यवस्था करना।
  • UIT वृक्षरोपण कराना, बाग-बगीचों, उपवनों, पार्को आदि का निर्माण व उनकी देखभाल करना।

UIT के आय के साधन : भू-खंडों के विक्रय से प्राप्त आय। सरकार द्वारा दिया गया ऋण। विकास कर से प्राप्त आय। भूखण्डों से हर वर्ष प्राप्त लीज राशि।

छावनी मंडल ( Cantonment Board ) शहरों के आस-पास सैनिक छावनी में स्थानीय प्रशासन हेतु छावनी मंडल स्थापित किए गए है।

छावनी मंडल भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के सीधे नियंत्रणाधीन व पर्यवेक्षणाधीन होते है।

इन पर राज्य सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है। राजस्थान में केवल नसीराबाद (अजमेर) में सैनिक छावनी में स्थानीय प्रशासन हेतु छावनी मंडल स्थापित है।

छावनी बोर्ड का अध्यक्ष सेना का कमांडिंग ऑफिसर होती है।

( 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के अधीन ) नगर निकाय-कुल 188

नगर पालिका (147)नगर परिषद् (34)नगर निगम (निगम 07 )
जनसंख्या20 हजार से अधिक किन्तु एक लाख तकएक लाख से अधिक व पाँच लाख तकपाँच लाख से अधिक
अध्यक्षअध्यक्ष/सभापतिसभापतिमहापौर
उपाध्यक्षउपाध्यक्ष/उपसभापतिउपसभापतिउपमहापौर
वार्ड सदस्यपार्षदपार्षदपार्षद

राज्य के राज्यपाल

सरदार गुरूमुख निहालसिंह 01.11.1956-15.04.1962
डॉ. सम्पूर्णानन्द16.04.1962-15.04.1967
सरदार हुकुम सिंह16.04.1967-30.06.1972
सरदार जोगेन्द्र सिंह01.07.1972-14.02.1977
श्री रघुकुल तिलक12.05.1977-08.08.1981
श्री ओमप्रकाश मेहरा06.03.1982-03.11.1985
श्री बी.आर. पाटिल20.11.1985-12.11.1987
श्री सुखदेव प्रसाद20.02.1988-02.02.1990
प्रो. देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय14.02.1990-25.08.1991
डॉ. एम. चेन्नारेड्डी 05.02.1992-30.05.1993
 श्री बलिराम भगत30.06.1993-01.05.1998
श्री दरबारा सिंह01.05.1998-22.05.1998
श्री अंशुमान सिंह16.01.1999-13.05.2003
श्री निर्मलचन्द जैन14.05.2003-22.05.2003
श्री मदनलाल खुराना14.01.2004-07.11.2004
श्रीमती प्रतिभा पाटिल08.11.2004-21.06.2007
श्री शैलेन्द्र सिंह06.09.2007 से 1.12.2009
श्रीमती प्रभाराव03.12.2009-24.04.2010
श्री शिवराज पाटिल28.04.10 से 12.05.2012
श्रीमती मारग्रेट अल्वा12.05.2013-08.08.2014
श्री रामनाइक 08.8.2014 से 04.9.2014
श्री कल्याणसिंह04.09.2014 से लगातार

– श्री शिवराज पाटिल (पंजाब के राज्यपाल) को तथा श्रीराम नाइक (राजस्थान उत्तरप्रदेश) को राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।

श्रीमती प्रतिभा पाटिल राज्य की प्रथम महिला राज्यपाल बनी थी

– राज्यपाल श्री दरबारा सिंह, श्री निर्मलचन्द जैन, श्री शैलेन्द्र सिंह एवं श्रीमती प्रभाराव का राज्यपाल के पद पर रहते हुए ( कार्यकाल के दौरान ) निधन हो गया था।

राज्य के सर्वाधिक समय तक रहे राज्य पाल सरदार गुरूमुख निहालसिंह थे।

राजस्थान में राज्यपाल को प्रशासनिक सहायता प्रदान करने के लिए एक राज्यपाल सचिवालय कार्यरत है। इस सचिवालय का प्रमुख राज्यपाल का सचिव होता है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा का वरिष्ठ अधिकारी होता है।

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